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पश्चिम बंगाल सरकार ने विनीत गोयल, इंदिरा मुखोपाध्याय और अभिषेक गुप्ता के निलंबन की अवधि में 120 दिन का और विस्तार कर दिया है। तीनों अधिकारियों पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में कथित कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों की जांच चल रही है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने विनीत गोयल, इंदिरा मुखोपाध्याय और अभिषेक गुप्ता के निलंबन की अवधि में 120 दिन का और विस्तार कर दिया है। तीनों अधिकारियों पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में कथित कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों की जांच चल रही है।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने आरजी कर प्रकरण की फाइल दोबारा खोली थी। घटना के समय विनीत गोयल कोलकाता के पुलिस आयुक्त थे, जबकि अभिषेक गुप्ता पुलिस उपायुक्त (उत्तर) और इंदिरा मुखोपाध्याय पुलिस उपायुक्त (मध्य) के पद पर तैनात थीं। सरकार ने तीनों अधिकारियों को निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। अब निलंबन की अवधि को 120 दिन और बढ़ा दिया गया है।
मामले की जांच के लिए न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा विशेष जांच दल का गठन किया गया है। जांच के सिलसिले में तीनों अधिकारियों को पिछले महीने सीबीआई कार्यालय में तलब किया गया था, जहां उनके बयान दर्ज किए गए।
उल्लेखनीय है कि, अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात एक महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आया था। प्रारंभिक जांच कोलकाता पुलिस ने की थी और आरोपित को गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि, बाद में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे। पीड़िता की पहचान उजागर होने, भ्रामक जानकारी देने तथा अस्पताल में सक्रिय कथित अवैध नेटवर्क को संरक्षण देने जैसे आरोप भी सामने आए थे।
इन विवादों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विनीत गोयल को कोलकाता पुलिस आयुक्त के पद से हटा दिया था, हालांकि उन्हें बाद में अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारी दी गई थी। उस दौरान इंदिरा मुखोपाध्याय और अभिषेक गुप्ता भी पुलिस की ओर से आयोजित कई पत्रकार वार्ताओं में प्रमुख रूप से शामिल रहे थे। जांच एजेंसियां अब तीनों अधिकारियों की भूमिका और कथित लापरवाही की विस्तार से जांच कर रही हैं।
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